Darlings Movie review and story of darlings netflix

Darlings Movie review and darlings netflix movie story

Darlings मूवी की कहानी एक हिंसक शादी में फंसी एक महिला की कहानी है । बदरुनिसा उर्फ बदरू (आलिया भट्ट) शमशुनिसा अंसारी उर्फ शमशु (शेफाली शाह) की बिटिया हैं । उसके पिता का कई साल पहले देहांत हो गया था । 

बदरू और हमजा शेख (विजय वर्मा) एक दूसरे से Love करते हैं । हमजा को रेलवे में job मिलने के बाद, वह शादी का प्रस्ताव रखतीं हैं । दोनों विवाह कर लेते हैं और मुंबई के बरहा चॉल के एक घर में रहने लगते हैं । 

शमशु भी उसी बिल्डिंग में रहती है, और वो भी उसी मंजिला पर जहां बदरू रहतीं हैं । तीन साल बीत जाते हैं, और फ़िर पता चलता है कि हमजा एक बेवड़ा और पत्नी को पीटने वाला इंसान है।

 वह प्रतिदिन रात में छोटी-छोटी बातों को लेकर बहस करता और बदरू से मारपीट करता था और सुबह होते ही वह माफ़ी भी मांग लेता था । तब बदरू अपने मियां को माफ कर दे्ती थी । 

और यह सब शमशु को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था कि हमजा उसकी बेटी को पीटे । वह अपनी बेटी बदरू को उससे छोड़ने का सुझाव देती है, और यदि संभव हो तो उसे मारने का सुझाव देती है ! 

हालाँकि, बदरू को लगता है कि वह एक दिन यह हालात बदल जाएगा और एक बार बच्चा होने के बाद ऐसा संभव हो सकता है। वह उसे शराब छोड़ने के लिए कहती है लेकिन वह ठर्रा नहीं छोड़ पा रहा है ।

Darlings movie review and darlings netflix story

एक दिन उसको पता चलता है कि उसे लीवर सिरोसिस की बीमारी है । डॉक्टर ने उसे चेतावनी दी कि अगर वह ऐसे ही खम्भा पीता रहेगा तो वह मर सकता है। 

हमजा बीमारी वाली बात को उससे छुपाता है और अच्छा बनने के लिए खुद ही शराब छोड़ने का नाटक करता है । उनका जीवन पहले से बहुत बेहतर हो जाता है और बदरू काफ़ी खुश रहती है। वह गर्भवती हो जाती है और यह उसके लिए सबसे बड़ी खुशी की बात रहती है। 

सब ठीक ठाक चल रहा होता है कि एक दिन हमजा बिना ठर्रा लगाए ही फिर हिंसक हो जाता है, इस बार वह बदरू पर इतना हिंसक हमला करता है कि उसका गर्भपात हो जाता है जो बड़े दुःख की बात है। सब कुछ ठीक चल रहा था और अचानक सबकुछ बदल जाता है उसे अस्पताल ले जाया जाता है । 

यहाँ, वह बदला लेने का फैसला करती है, वह नींद न आने की झूठी करके डॉक्टर से नींद की गोलियां मांगती है और हमजा को उसकी जानकारी के बिना गोलियां दे देती है । 

जब वह सो जाता है, बदरु उसे बांध देती है। शमशु बदरु की साथी-अपराधी बन जाती है, हालांकि वह यह समझने में असफल रहती है कि उसकी बेटी बदरु हमजा के साथ क्या करने की प्लानिंग बना रही है । इसके आगे क्या होता है इसके लिए आपको नेटफ्लिक्स पर फिल्म देखनी होगी ।

जसमीत के रीन और परवेज शेख की कहानी अच्छी काफी प्रभावशाली है । जसमीत के रीन और परवेज शेख की पटकथा बेहद मनोरंजक है । यह हंसाती भी है और साथ ही घरेलू हिंसा पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करतीं है। 

सभी पात्रों को लेखकों ने बहुत ही शानदार ढंग से पिरोया है । विजय मौर्य, जसमीत के रीन और परवेज शेख के डायलॉग लोट पोट कर देने वाले हैं ।

जसमीत के रीन का निर्देशन लाजवाब है और यह सोच पाना मुश्किल है कि यह उनकी पहली फीचर फिल्म है क्योंकि उन्होंने इस कहानी को इतनी अच्छी तरह से बांध दिया है । 

चुना गया विषय सही है क्योंकि इस दुनिया में ऐसे बहुत लोग इससे संबंधित हो सकते हैं; और उनके लिए यह देख पाना मुश्किल होगा कि बदरू और शमशु नालायक हमजा को कैसे सबक सिखाती हैं । 

साथ ही, फिल्म को समझना कठिन नहीं होती है क्योंकि इसे इतनी सरलता से दर्शाया जाता है कि यह दर्शकों के एक बड़े वर्ग को अपनी ओर आकर्षित कर सके । 

फिर भी, कुछ पहलू और बारीकियां creative हैं और impact को बढ़ाती हैं । उदाहरण के लिए, जिस तरह से मां और बेटी दोनों खिड़की से संवाद करती हैं वह बड़ा प्यारा है । 

इसके अलावा, बदरू ने Hot एक-कंधे वाली लाल पोशाक पहनी हुई थी, लेकिन वह इस बात का ध्यान रखी है कि उसके निशान नहीं छिपे, जो यादगार है। 

दूसरी ओर, कुछ घटनाक्रम बहुत ही सुविधाजनक हैं । यह भी हैरान करने वाली बात है कि अपहरण होने पर हमजा मदद के लिए गुहार क्यों नहीं लगायी, खासकर जब यह पता हो जाता है कि उनके घर में जो होता है वह आसपास के पड़ोसियों द्वारा भी सुना जाता है । 

आखिरी में, रिडिपलपमेंट एंग़्ल और शमशु का खाना पकाने का बिजनेस ट्रैक किसी भी तरह से एक बिंदु के बाद मुख्य कथा के साथ अच्छी तरह से बिल्कुल भी मेल नहीं खाता है ।

डार्लिंग्स की शुरूआत बहुत जबरदस्त होती है । घरेलू हिंसा का पहला भाग किसी को भी हैरान कर सकता है, हालांकि फिल्म निर्माता इसमें हिंसा को नहीं दिखाते हैं। 

फिल्म यहां थोड़ी सी दोहराई जाती है, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे हमजा अपना दिमाग खो देता और पागलपन सवार होकर मारपीट करता और अगले दिन बदरू उसे बड़े आसानी से माफ कर देता। 

हालाँकि यह महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्माताओं को हमजा को बदरू के पति को सबक सिखाने के लिए ठोस आधार सेट करने की आवश्यकता थी।

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